साई की कृपा से घने जंगल में भी नाना को मिली चाय☕️

श्री साई नाथाय नमः

श्री नाना साहेब चाँदोरकर मामलतदार बन पछोरा के समीप एक तालुका में स्थानांतरित हुए ! एक बार उनके मन में पद्मालय तीर्थ यात्रा करने की इच्छा जागृत हुई !उन्होंने उस तालुका में नियुक्त अपने साथी अफसर को यातायात हेतु व्यवस्था करने को कहा !यात्रा के समय नाना सही समय घर से निकले, परंतु रेलवे स्टेशन देरी से पहुँचने के कारण उनकी गाड़ी छूट गयी ! इस कारण नाना और उनके मित्र दोपहर के समय पचोरा नहीं पहुँच सके और अगली ट्रैन से शाम में पछोरा पहुंचे ! तांगा वाला स्टेशन पर नाना की प्रतीक्षा कर वापस लौट गया !

स्टेशन पहुँचने पर नाना ने पैदल ही मंदिर जाने का फैसला किया ! चढ़ाई कठिन थी और जंगल भी पार करना था ! नाना को पहाड़ी रास्ते का लम्बा सफर तय करने की आदत नहीं थी !कष्ट से बचने के लिए नाना हांफते हांफते बाबा का नाम जप आरम्भ कर दिया ! बाबा की कृपा से वह उस कष्ट मार्ग को आसानी से तय कर गए ! नाना का बाबा पर अटूट विश्वास था, उनके नाम का स्मरण करते ही बाबा ने मुश्किलोंको भी आसान कर दिया !

यात्रा में विलम्ब के कारण और काफी रात बीत जाने की वजह से नाना ने अपने मन में चिंतन कर यह निश्चित किया की पुजारी (गोविन्द बुआ ) मंदिर बंद कर अपने घर लौट गए होंगे !उधर थकवाट और भूख के कारण नाना का बुरा हाल था ! उन्होंने पूर्ण तन्मयता से बाबा को याद कर प्रार्थना की – “बाबा मै जानता हु की इस समय भोजन मिल पाना असंभव है लेकिन अगर आप चाय से भरी केतली की व्यवस्था करा दे तो मै संतुष्ट हो जावूंगा !” ऐसा कहकर नाना अपने साथियोंके साथ तेजी से मंदिर की ओर बढ़ने लगे ! रात ग्यारह बजे जब वे मंदिर के निकट पहुंचे तो मंदिर के द्वार खुले हुए थे और गोविन्द पुजारी ने दूर से नाना व उनके साथीयोंको देख कर जोर से आवाज़ लगाई -“क्या नाना आरहे है ?!” एक डिप्टी कलेक्टर को उसके नाम से ऐसा पुकारना अशिष्ट माना जासकता है ! नाना भी पुजारी के ऐसा कहने पर क्रोधित न हुए, बल्कि प्रसन्न होते हुए उन्होने पुजारी से पुछा, ” अरे, आपको किस प्रकार पता चला की नाना यहाँ आरहे है ?” पुजारी बोले -“मुझे श्री साईबाबा से आकाशीय सुचना मिली जिसमे बाबा ne मुझे कहाँ -“मेरा नाना भूखा, प्यासा व थका -माँदा तुम्हारे पास आ रहा है !उसके लिए चाय की व्यवस्था करना “! लीजिए, आप सभी केलिए यहाँ चाय तैयार है !

ऐसा कहा पुजारी ने नाना को चाय का कप पेश किया !

इस घटना से यह स्पष्ट होता है की बाबा अपने प्रिय भक्तोंकी सुरक्षा और सुविधा का ख्याल पहाड़ियों व घने जंगलोंमें भी रखते है ! अपने भक्त कही भी हो उनका पीछा बाबा करते है !

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