సాయి వాణి :విశ్వాసం తో నన్ను నమ్ము. నిన్ను అన్ని వైపుల నుండి రక్షించేదను . నాపై నమ్మకం కలవారికి జయము కలుగును.

भक्तोंके अपनोंकी चिंता भी साई को रहती है 🙏

ओम श्री साई नाथायनमः

हरी भावु कार्णिक ककी बहु का मानसिक स्वास्थ्य बिगड़ गया था !उन्हें अक्सर फिट्स आती थी और उस समय वह अपने हाथ में जो चीज़ है उसे फेंक देती थी और अपने आप को घायल कर देती थी !उसके पति अनेक doctors को दिखाने पर भी कोई इलाज़ नहीं करपाए !जब कार्णिक को यह बात मालूम हुआ तो वह तुरंत अपने गांव से मुंबई के लिए रेल से निकले !रेल परेल नामके स्टेशन को पहुँचने पर, सफ़ेद कफ़नी पहने हुए , नीले आँख वाले एक फ़कीर रेल चढ़ कर कार्णिक के पास ही बैठे ! दोनोंमे बात चीत शुरू हुयी !फ़कीर ने उनसे बोले की भगवन ने इस सृष्टि में अनेक पेड़ और पौधोंकी सृष्टी की है !लेकिन उनसे कैसा लाभ उठाना हमे नहीं पता है !कुछ पेड़ के पत्ते के रस निकालकर दीवाने लोगोंको देते तो उनका पागलपन दूर हो जाता है !और फिट्स से जो ग्रस्त है उन्हें भी यह रस दिव्य औषध की भांति काम करती है ! यह न जानते हुए हम doctors के चक्कर काटते हुए अपने धन और समय व्यर्थ गवाँते है !” कहते हुए वे फ़कीर कार्णिक को एक पेड़ का नाम बताकर उस पेड़ के पत्ते का उपयोग करने का सलाह दिया था !अपनी समस्या का हल बतानेवाले उस फ़कीर को भगवान् रूप मानकर कार्णिक ने उनको नमस्कार किया और शांत चित्त से अपने सीट पर नींद में खो गया ! जब बांद्रा का स्टेशन आया, तब वह नींद से उठ कर देखे तो वह फ़कीर वहाँ नहीं थे !कार्णिक रेल से उतर कर देखे तो, स्टेशन के प्लेटफार्म पर वह पेड़ दिखाई दिया जो फ़कीर उसे बोले !तब कार्णिक की खुशी की सीमा नहीं थी! वह तुरंत वह पेड़ के पत्ते लेकर अपने घर गया और उनके रस निकालकर अपने बहु से पिलवायें ! बहुत आश्चर्य !! तब से उसके बहु का रोग कम हुआ और उसको स्वास्थ्य मिला !उसके पति सहित सब लोग आनंदकर परिणाम से आश्चर्य और आनंद का अनुभव किये! डॉक्टर भी अपने दवा से जो इलाज़ नहीं हुआ वह एक फ़कीर के बोले रस का सेवन से कैसा हुआ सोंच कर आश्चर्य में पड़ गए.!कार्णिक ने त बताया की, “यह सब साई की लीला है, और इस लीला में साई के वाणी ही दवा जैसा काम की है न की वह पेड़ के पत्ते !साई की कृपा से पागल पेड़ के पत्ते भी संजीवनी जैसा काम करेंगे “

बाद में जब कार्णिक कुछ समय बाद फिर शिरडी पहुंचे, तब बाबा ने कार्णिक की तरफ इशारा करते हुए कहाँ, “यह अपने बहु की तबीयत की वजह से परेशान है, इसलिए मुझे वहाँ जाकर रोग का इलाज़ के लिए सलाह देना पड़ा ! उसका रोग कम हुआ और सब आनंदित हुए “

इस तरह साई अपने भक्त के अपनोंके बारे में भी सदैव जागरूक होकर उनके खुशी के बारे में सोंचते है !🙏

जय साई राम !

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